बेटी के बयान से मां की कुर्सी गई! तेलंगाना में मंत्री कोंडा सुरेखा कैबिनेट से बाहर, जाते-जाते CM रेवंत पर उठाए सवाल
तेलंगाना कांग्रेस में कई दिनों से चल रहा अंदरूनी विवाद आखिरकार कोंडा सुरेखा की कैबिनेट से विदाई तक पहुंच गया। उनकी बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल की मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और उनके करीबियों को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद पार्टी के भीतर कार्रवाई की मांग उठी थी। सुरेखा ने खुद इस्तीफा देने से इनकार किया और कहा कि बेटी के बयान के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें मंत्रिपरिषद से हटाने की सिफारिश राज्यपाल को भेज दी।

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बुधवार को कोंडा सुरेखा दिल्ली में अपनी कुर्सी बचाने की कोशिश कर रही थीं। उनका तर्क था—मंत्री के तौर पर काम पर सवाल नहीं है, भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है और एक स्वतंत्र, विवाहित बेटी के बयान की सजा मां को क्यों मिले? लेकिन करीब 24 घंटे के भीतर तेलंगाना की राजनीति में फैसला हो गया। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सुरेखा को अपनी कैबिनेट से हटाने का निर्णय ले लिया।
मामला केवल एक बयान पर हुई नाराजगी तक सीमित नहीं रहा। बेटी के आरोप, कांग्रेस विधायकों की प्रतिक्रिया, अनुशासन समिति की रिपोर्ट, दिल्ली में हाईकमान के साथ बैठकों और सुरेखा के खुले प्रतिरोध के बाद विवाद सीधे मंत्री पद तक पहुंच गया।
19 अगस्त के बयान से शुरू हुआ राजनीतिक तूफान
विवाद की जड़ कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल की टिप्पणियां बनीं। 19 अगस्त को उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और उनके परिवार को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद तेलंगाना कांग्रेस के भीतर नाराजगी बढ़ने लगी।
पार्टी के विधायकों का एक वर्ग चाहता था कि सुरेखा अपनी बेटी की टिप्पणियों की सार्वजनिक रूप से निंदा करें। लेकिन सुरेखा ने ऐसा करने के बजाय यह सवाल उठाया कि एक वयस्क बेटी के बयान के लिए उन्हें जिम्मेदार कैसे माना जा सकता है।
यहीं से मामला बेटी के बयान से निकलकर कोंडा सुरेखा बनाम पार्टी अनुशासन की लड़ाई में बदल गया।
सुरेखा बोलीं- बेटी स्वतंत्र है, मैं उसके बयान की जिम्मेदार नहीं
कार्रवाई की आशंका के बीच सुरेखा दिल्ली पहुंचीं और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से साफ कहा कि वे इस्तीफा नहीं देना चाहतीं।
सुरेखा का कहना था कि उनकी बेटी विवाहित है, स्वतंत्र रूप से अपना जीवन जी रही है और अपने विचार रखने के लिए आजाद है। इसलिए बेटी के बयान की जिम्मेदारी उन पर डालना उचित नहीं है।
उन्होंने अपने मंत्री पद का बचाव करते हुए यह भी कहा कि उनके कामकाज पर सवाल नहीं उठे हैं और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है।
इस्तीफा नहीं दिया तो कैबिनेट से हटाने का फैसला
सुरेखा के तेवर से यह साफ हो गया था कि वह अपनी तरफ से मंत्री पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं। इसी बीच कांग्रेस नेतृत्व के स्तर पर लगातार बैठकें हुईं।
3 सितंबर को मुख्यमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी कि रेवंत रेड्डी ने कोंडा सुरेखा को मंत्रिपरिषद से हटाने का फैसला किया है। उनकी बर्खास्तगी की औपचारिक सिफारिश राज्यपाल को भेज दी गई।
यानी जिस विवाद में सुरेखा यह कह रही थीं कि बेटी के बयान की सजा उन्हें नहीं मिलनी चाहिए, उसी विवाद के बाद उनकी मंत्री की कुर्सी चली गई।
पहले ही एक्शन की सिफारिश कर चुकी थी अनुशासन समिति
यह फैसला अचानक नहीं आया। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति सुरेखा के मामले की समीक्षा कर चुकी थी।
समिति ने 20 अगस्त को अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ को सौंपी थी और सुरेखा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की थी। बाद में मामला पार्टी हाईकमान तक पहुंचा।
इस दौरान मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के नेताओं की दिल्ली में AICC के वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा हुई।
जाते-जाते सुरेखा ने अपने विरोधियों पर भी उठाए सवाल
सुरेखा ने अपने खिलाफ आवाज उठाने वाले कांग्रेस विधायकों को भी निशाने पर लिया। उनका कहना था कि इतने विधायक अपनी मर्जी से एक साथ उनके खिलाफ नहीं बोल रहे होंगे।
हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनके मुताबिक इन नेताओं के पीछे कौन था।
सुरेखा ने उल्टा सवाल उठाया कि अगर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है तो पार्टी को दूसरे नेताओं के सार्वजनिक बयानों की भी जांच करनी चाहिए। उन्होंने खुद को भेजे गए कारण बताओ नोटिस पर भी आपत्ति जताई थी।
सिर्फ सुरेखा नहीं, चिन्ना रेड्डी पर भी गिरी गाज
तेलंगाना कांग्रेस में कार्रवाई सिर्फ कोंडा सुरेखा तक सीमित नहीं रही। मुख्यमंत्री ने जी. चिन्ना रेड्डी को तेलंगाना योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद से हटाने का भी फैसला किया।
उनके खिलाफ पार्टी विधायक टी. मेघा रेड्डी को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद अनुशासन समिति ने कार्रवाई की सिफारिश की थी। उनकी जगह गडवाल विजयलक्ष्मी को योजना बोर्ड का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
बेटी का बयान या कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई?
ऊपरी तौर पर कोंडा सुरेखा की विदाई की वजह उनकी बेटी की विवादित टिप्पणियों से शुरू हुआ अनुशासनात्मक मामला है। लेकिन घटनाक्रम ने तेलंगाना कांग्रेस के भीतर चल रहे तनाव को भी सार्वजनिक कर दिया है।
पहले बयान, फिर विधायकों का विरोध, अनुशासन समिति, दिल्ली में हाईकमान के सामने सफाई और आखिर में कैबिनेट से बाहर करने का फैसला—इस पूरे घटनाक्रम ने दिखाया कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को सिर्फ पारिवारिक बयान मानकर छोड़ने के लिए तैयार नहीं था।
अब बड़ा सवाल यह है कि मंत्री पद गंवाने के बाद कोंडा सुरेखा पार्टी नेतृत्व के फैसले को स्वीकार करती हैं या तेलंगाना कांग्रेस के भीतर यह टकराव आगे और बढ़ता है।
