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ग्वालियर के विंडसर हिल्स ड्यूप्लेक्स से ₹100 करोड़ का ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क चलाने का दावा, पांच गिरफ्तार
ग्वालियर पुलिस की क्राइम ब्रांच और साइबर विंग ने विंडसर हिल्स में किराए के एक ड्यूप्लेक्स पर छापा मारकर पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी "100Panel" नाम के प्लेटफॉर्म से ऑनलाइन सट्टेबाजी चला रहे थे और इसका लेनदेन करीब ₹100 करोड़ तक पहुंच सकता है। जांच में दुबई और श्रीलंका केलोकस्वामी ग्राफिक्स
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ग्वालियर के विंडसर हिल्स ड्यूप्लेक्स से ₹100 करोड़ का ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क चलाने का दावा, पांच गिरफ्तार

Digital News Desk5 min read14/09/26

ग्वालियर पुलिस की क्राइम ब्रांच और साइबर विंग ने विंडसर हिल्स में किराए के एक ड्यूप्लेक्स पर छापा मारकर पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी "100Panel" नाम के प्लेटफॉर्म से ऑनलाइन सट्टेबाजी चला रहे थे और इसका लेनदेन करीब ₹100 करोड़ तक पहुंच सकता है। जांच में दुबई और श्रीलंका के बुकियों से कथित संपर्क सामने आया है।

Lokswami AI

ग्वालियर में एक किराए के ड्यूप्लेक्स से चल रहा ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क पुलिस के रडार पर आ गया। क्राइम ब्रांच और साइबर विंग की टीम ने विंडसर हिल्स इलाके में संदिग्ध गतिविधि की सूचना पर छापेमारी की और पांच लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क के जरिए करीब ₹100 करोड़ का लेनदेन हुआ है, और आरोपियों के तार कथित तौर पर दुबई और श्रीलंका के बुकियों से जुड़े होने का शक है।

गिरफ्तार आरोपियों में सोहित करेर (22), दिनेश रायकवार (28), शांतनु श्रीवास (20), सुमित कुशवाह (26) और दीपक आर्य (34) शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि ये लोग एक बड़े नेटवर्क में स्थानीय ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहे थे, पूरा सिस्टम शायद इनके हाथ में नहीं था।


"100Panel" से चल रहा था कथित ऑपरेशन

पुलिस का दावा है कि आरोपी "100Panel" नाम के एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सट्टेबाजी और गैंबलिंग के लिए कर रहे थे। छापेमारी में ड्यूप्लेक्स से मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड, चेकबुक, बैंक पासबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड और क्रेडिट कार्ड बरामद हुए हैं।

जांच टीम अब इन डिवाइसों की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकें और उन बैंक खातों की पहचान हो सके जिनके जरिए पैसा घूमता रहा।

यह पहली बार नहीं है जब ग्वालियर में "100 Panel" नाम सामने आया हो। पहले भी एक मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने कबूल किया था कि वे Rediana, Khiladi 99X और 100 Panel जैसे प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे थे। उस मामले में आरोपियों ने बताया था कि वे मूल बैंक खातों (mule accounts) और QR कोड के जरिए पैसा इकट्ठा करते थे और ग्राहकों के लिए गेमिंग आईडी बनाते थे, और इसके बदले ₹15,000 महीना सैलरी और कमीशन मिलता था।

वर्तमान मामले में भी विंडसर हिल्स के पांचों आरोपी कमीशन के आधार पर काम करने का दावा कर रहे हैं, जो पुराने पैटर्न से काफी मिलता-जुलता है।


दुबई और श्रीलंका कनेक्शन की जांच शुरू

इस मामले को और गंभीर बनाने वाली बात है इसमें कथित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि वे WhatsApp के जरिए दुबई और श्रीलंका के बुकियों के सीधे संपर्क में थे।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या ये विदेशी संपर्क बेटिंग पैनल को कंट्रोल करते थे, बैंकिंग निर्देश देते थे, या मुनाफे का हिस्सा लेते थे।

₹100 करोड़ के आंकड़े पर भी बारीकी से जांच जरूरी है। सट्टेबाजी के मामलों में ऐसे आंकड़े अक्सर खातों से गुजरे कुल लेनदेन को दिखाते हैं, न कि छापे में बरामद असली रकम को। यानी ₹100 करोड़ की ट्रांजैक्शन ट्रेल का मतलब यह नहीं कि आरोपियों ने खुद उतनी कमाई की। जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि कितने खाते इस्तेमाल हुए, कितनी बार एक ही रकम खातों के बीच घूमी, और असल सट्टेबाजी मुनाफा कितना था।


बेटिंग पैनल क्या होता है और यह कैसे काम करता है

बेटिंग पैनल दरअसल एक ऑनलाइन एडमिन सिस्टम होता है, जिसके जरिए यूजर अकाउंट बनाए जाते हैं, बैलेंस असाइन किया जाता है और दांव मैनेज किए जाते हैं।

स्थानीय ऑपरेटर ग्राहकों के लिए लॉगिन आईडी बनाते हैं और तय बैंक खातों में पैसा जमा कराते हैं। पैनल ऑपरेट करने वाला व्यक्ति फिर ग्राहक के बेटिंग बैलेंस को डिजिटली क्रेडिट कर देता है। जब यूजर जीतते हैं या पैसा निकालना चाहते हैं, तो रकम दूसरे खातों के जरिए ट्रांसफर होती है।

इस तरह के सिस्टम को ट्रेस करना मुश्किल होता है क्योंकि बेटिंग वेबसाइट, बैंक अकाउंट होल्डर, लोकल ऑपरेटर और असली आयोजक, सब अलग-अलग लोग हो सकते हैं।

मूल अकाउंट (mule account) इस पूरे सिस्टम की रीढ़ है। ये वे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल बड़े क्रिमिनल नेटवर्क का पैसा प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया जाता है। असली खाताधारक को इसके बदले कमीशन मिलता है।


ग्वालियर पुलिस के लिए यह पैटर्न नया नहीं

पहले वाले मामले से मिलता जुलता मॉडल इस केस में भी नजर आ रहा है। पुलिस के मुताबिक पहले के केस में ऑपरेटर मूल अकाउंट से जुड़े QR कोड ग्राहकों को भेजते थे और मुनाफा किसी अलग कथित आयोजक तक पहुंचाते थे। वह आयोजक WhatsApp ग्रुप्स के जरिए बार-बार नए बैंक खाते सप्लाई करता था। इस तरह की संरचना सट्टेबाज और नेटवर्क को कंट्रोल करने वाले व्यक्ति के बीच कई परतें बना देती है।

इस साल दूसरे शहरों में भी इसी स्तर के मामले सामने आए हैं। अप्रैल में झांसी पुलिस ने एक ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट पकड़ा था, जिसमें रिकॉर्ड्स के मुताबिक ₹100 करोड़ से ज्यादा का लेनदेन हुआ था और तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। कानपुर पुलिस ने भी करीब तीन महीने में ₹100 करोड़ के लेनदेन वाले एक अंतरराष्ट्रीय सट्टा नेटवर्क का दावा किया था, जिसमें दुबई और थाईलैंड से कथित संपर्क बताया गया था और आठ लोग गिरफ्तार हुए थे।

ये मामले विंडसर हिल्स की जांच से सीधे तौर पर जुड़े नहीं हैं, लेकिन इनसे यह साफ होता है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क अब एक जगह की गैंबलिंग तक सीमित नहीं, बल्कि बिखरे हुए बैंक खातों और विदेशी कोऑर्डिनेटर्स पर निर्भर करते जा रहे हैं।


डिवाइस, खाते और विदेशी संपर्क, अब जांच किस दिशा में

विंडसर हिल्स मामले की जांच अब कई दिशाओं में आगे बढ़ रही है। फॉरेंसिक टीम जब्त फोन और लैपटॉप की जांच कर रही है, वहीं बैंकिंग दस्तावेजों से यह पता चल सकता है कि ड्यूप्लेक्स से कितने खाते कंट्रोल या एक्सेस किए जा रहे थे।

पुलिस कथित दुबई और श्रीलंका संपर्कों की पहचान करने में भी जुटी है। इसके अलावा ड्यूप्लेक्स के मालिक की भूमिका की भी जांच हो रही है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि किरायेदार का वेरिफिकेशन हुआ था या नहीं, और मकान मालिक को इस गतिविधि की जानकारी थी या नहीं। अभी तक मकान मालिक की संलिप्तता को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि गिरफ्तार पांचों लोग सिर्फ कमीशन पर काम करने वाले लोकल ऑपरेटर थे, या नेटवर्क के मैनेजमेंट ढांचे का हिस्सा। डिजिटल सबूत और अकाउंट ट्रेल ही तय करेंगे कि जांच एजेंसियां ग्वालियर के बाहर बैठे कथित नेटवर्क संचालकों तक कितनी दूर पहुंच पाती हैं।

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