LIVE
होम
FCRA संशोधन विधेयक अब संयुक्त संसदीय समिति के पास
लोकसभा ने विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 को विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया है।लोकस्वामी ग्राफिक्स
National
ई-पेपर

FCRA संशोधन विधेयक अब संयुक्त संसदीय समिति के पास

Digital News DeskDigital News Desk4 min read12/08/26

लोकसभा ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने प्रस्ताव रखते हुए कहा कि समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे। समिति को शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। विधेयक में FCRA पंजीकरण समाप्त होने, रद्द होने या नवीनीकरण न होने की स्थिति में विदेशी अंशदान और उससे बनी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए नया ढांचा प्रस्तावित किया गया है।

Lokswami AI

नई दिल्ली। विदेशी चंदे से जुड़े कानून में बदलाव का रास्ता फिलहाल सीधे संसद से नहीं, अब एक संसदीय समिति से होकर गुजरेगा। लोकसभा ने बुधवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को विस्तृत जांच और व्यापक विचार-विमर्श के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक समिति में कुल 31 सदस्य होंगे—इनमें लोकसभा के 21 सदस्य अध्यक्ष द्वारा और राज्यसभा के 10 सदस्य सभापति द्वारा नामित किए जाएंगे। समिति को अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा में प्रस्तुत करनी है।

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि FCRA संशोधन विधेयक पिछले कई महीनों से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ था। विधेयक को पहली बार 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसका उद्देश्य विदेशी अंशदान के इस्तेमाल और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर मौजूदा कानून में बदलाव करना है।

क्या बदलना चाहता है नया विधेयक?

मौजूदा FCRA कानून के तहत किसी संस्था को विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार से पंजीकरण प्रमाणपत्र लेना होता है। यह प्रमाणपत्र पांच साल के लिए वैध होता है और समय-समय पर उसका नवीनीकरण कराना पड़ता है।

प्रस्तावित संशोधन में सबसे बड़ा बदलाव उन संस्थाओं से जुड़ा है जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो जाए, वे स्वयं उसे छोड़ दें या उसका नवीनीकरण न हो पाए।

विधेयक ऐसे मामलों में विदेशी अंशदान और उससे बनाई गई संपत्तियों के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाने का प्रावधान करता है। यह प्राधिकरण संबंधित विदेशी धन और उससे बनाई गई संपत्तियों की निगरानी, प्रबंधन और आवश्यकता पड़ने पर उनके निपटान की जिम्मेदारी संभाल सकेगा।

अगर किसी संस्था का पंजीकरण समाप्त होने के बाद तय अवधि के भीतर नया पंजीकरण या नवीनीकरण नहीं होता, तो विदेशी अंशदान से बनाई गई संपत्तियां स्थायी रूप से इस नामित प्राधिकरण के नियंत्रण में जा सकती हैं।

धार्मिक स्थल से जुड़ी संपत्ति पर अलग सुरक्षा

विधेयक में एक महत्वपूर्ण प्रावधान धार्मिक स्थलों से जुड़ी संपत्तियों को लेकर भी है। यदि विदेशी अंशदान से बनाई गई संपत्ति किसी धार्मिक स्थल के रूप में इस्तेमाल हो रही है, तो नामित प्राधिकरण को उसका धार्मिक स्वरूप बनाए रखने का प्रावधान करना होगा।

सजा के प्रावधान में भी बदलाव

प्रस्तावित विधेयक FCRA उल्लंघन के मामलों में अधिकतम सजा को भी बदलता है। PRS के विश्लेषण के अनुसार मौजूदा कानून में कुछ उल्लंघनों पर अधिकतम पांच साल की कैद का प्रावधान है, जबकि नया विधेयक इसे घटाकर एक साल करने का प्रस्ताव करता है।

यानी एक तरफ सरकार विदेशी अंशदान और उससे बनी संपत्तियों पर प्रशासनिक निगरानी का ढांचा मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ कुछ आपराधिक दंड को हल्का करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

विवाद कहां है?

विधेयक को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी संस्था का FCRA प्रमाणपत्र नवीनीकृत नहीं होता, तो उसकी पहले से बनी संपत्तियों का क्या होगा।

PRS के विश्लेषण में कहा गया है कि विधेयक के तहत ऐसी संपत्तियां नामित प्राधिकरण के नियंत्रण में जा सकती हैं। इससे उन संस्थाओं पर भी असर पड़ सकता है जिन्होंने अतीत में वैध विदेशी अंशदान से भवन, अस्पताल, स्कूल, संस्थान या दूसरी संपत्तियां बनाई हों।

एक दूसरा सवाल अपील की प्रक्रिया को लेकर है। PRS के मुताबिक मौजूदा कानून और प्रस्तावित विधेयक में FCRA प्रमाणपत्र के नवीनीकरण से इनकार की स्थिति में अलग से स्पष्ट अपील व्यवस्था का प्रावधान नहीं है।

इन्हीं कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं के कारण विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब आगे क्या होगा?

अब संयुक्त संसदीय समिति विधेयक की धाराओं का अध्ययन करेगी। समिति विभिन्न मंत्रालयों, विशेषज्ञों, नागरिक संगठनों और अन्य पक्षों से सुझाव भी ले सकती है।

इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेगी। सरकार चाहे तो समिति की सिफारिशों के आधार पर विधेयक में बदलाव कर सकती है, या मौजूदा स्वरूप में भी इसे आगे बढ़ा सकती है।

इसलिए यह साफ है कि FCRA संशोधन विधेयक अभी कानून नहीं बना है। लोकसभा ने इसे पारित नहीं किया, बल्कि विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा है।

अगला बड़ा राजनीतिक और कानूनी फैसला अब समिति की रिपोर्ट के बाद होगा।

तथ्य बनाम राजनीतिक दावा

पुष्ट तथ्य: लोकसभा ने FCRA संशोधन विधेयक, 2026 को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया है। समिति में 31 सदस्य होंगे और रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंत तक देने का प्रस्ताव है।

सरकार का पक्ष: विधेयक का उद्देश्य विदेशी अंशदान के इस्तेमाल को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

अभी तय नहीं: समिति विधेयक में किन बदलावों की सिफारिश करेगी और सरकार उन सिफारिशों को कितना स्वीकार करेगी।

संबंधित खबरें

फ्लाइट में बैठते ही AC ठप, गर्मी से घुटने लगा दम... दिल्ली-पुणे SpiceJet की उड़ान से पहले यात्रियों का हंगामा
National

फ्लाइट में बैठते ही AC ठप, गर्मी से घुटने लगा दम... दिल्ली-पुणे SpiceJet की उड़ान से पहले यात्रियों का हंगामा

दिल्ली से पुणे जा रही स्पाइसजेट फ्लाइट में बोर्डिंग के बाद AC नहीं चलने से यात्री परेशान हो गए। गर्मी और घुटन बढ़ने पर विरोध हुआ और विमान को वापस बे में लाना पड़ा।

पूरी खबर
देश की 5 बड़ी खबरें: FCRA से सुप्रीम कोर्ट तक, जानिए आज के प्रमुख राष्ट्रीय अपडेट
National

देश की 5 बड़ी खबरें: FCRA से सुप्रीम कोर्ट तक, जानिए आज के प्रमुख राष्ट्रीय अपडेट

देश में आज FCRA विधेयक, सुप्रीम कोर्ट के अहम मामलों, NEET-PG नियमों, रेलवे और वैश्विक आर्थिक संकेतों से जुड़े कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं।

पूरी खबर
एक साल तक पुलिस को चकमा देती रही ‘लोला’, चेहरा तक बदल डाला; लखनऊ के हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट की आरोपी गिरफ्तार
National

एक साल तक पुलिस को चकमा देती रही ‘लोला’, चेहरा तक बदल डाला; लखनऊ के हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट की आरोपी गिरफ्तार

उज्बेकिस्तान की लोला कायूमोवा को लखनऊ में गिरफ्तार किया गया है। उस पर विदेशी महिलाओं को लाकर देह व्यापार कराने और फर्जी दस्तावेजों से पहचान छिपाने के आरोप हैं। वह जून 2025 से फरार थी।

पूरी खबर
पाकिस्तान से नेपाल, फिर कोलकाता में ‘कारपेंटर’... STF के हत्थे चढ़ा कथित ISI एजेंट, फर्जी पहचान से छिपा था असली चेहरा
National

पाकिस्तान से नेपाल, फिर कोलकाता में ‘कारपेंटर’... STF के हत्थे चढ़ा कथित ISI एजेंट, फर्जी पहचान से छिपा था असली चेहरा

पश्चिम बंगाल STF ने पाकिस्तानी नागरिक राणा राउफ को उत्तर 24 परगना से गिरफ्तार किया है। एजेंसी का दावा है कि वह फर्जी भारतीय पहचान के सहारे कोलकाता में रह रहा था और बांग्लादेश भागने की तैयारी में था।

पूरी खबर