उज्जैन में शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने पर बनी सहमति के बाद फिर भी पथराव, 10 पर FIR; शहर काजी बोले- अफवाहों पर ध्यान न दें
सिंहस्थ 2028 के लिए प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण के बीच शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान तनाव की स्थिति बनी। पथराव के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और मामले में 10 लोगों पर FIR दर्ज की है।

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उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए चल रहे सड़क चौड़ीकरण का काम सोमवार को तनाव के बीच आगे बढ़ा। कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक प्रस्तावित मार्ग में बाधा बन रहे शाही मस्जिद के करीब 10 फीट हिस्से को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रशासन और मुस्लिम समाज के बीच बातचीत के बाद समाज के लोग खुद इस हिस्से को हटाने के लिए पहुंचे थे, लेकिन मौके पर नारेबाजी और विरोध के बाद स्थिति बिगड़ गई।
पुलिस के मुताबिक, दोपहर करीब 12 बजे फिर पथराव हुआ। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया। मामले में 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस आगे की पहचान और घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। पथराव में क्राइम ब्रांच की महिला टीआई पुष्पा पांचाल के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।
जिस हिस्से को हटाया जा रहा है, वहां क्यों जरूरी है सड़क चौड़ीकरण?
उज्जैन मास्टर प्लान 2035 में कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक करीब 15 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित है। प्रशासन के मुताबिक शाही मस्जिद का करीब 10 फीट हिस्सा इस प्रस्तावित सड़क की सीमा में बाधक बन रहा था।
यह मार्ग महाकालेश्वर मंदिर, गोपाल मंदिर और शिप्रा तट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ता है। प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ और दूसरे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए मार्ग का विस्तार किया जा रहा है।
शहर काजी ने कहा- मामला रात में ही सुलझ गया था
तनाव के बीच उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मस्जिद से जुड़े मामले को लेकर रात में ही सहमति बन गई थी और समाज के लोगों को बेवजह मौके पर जाने या बाजार में जमा होने की जरूरत नहीं है।
शहर काजी ने लोगों से घर से बाहर निकलकर भीड़ का हिस्सा नहीं बनने और शांति बनाए रखने की अपील की। उनका कहना था कि जिस बात पर सहमति बनी है, उसके अनुसार काम आगे बढ़ना चाहिए।
कलेक्टर बोले- लोग खुद दे रहे हैं सहयोग
उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा कि सिंहस्थ 2028 को देखते हुए शहर में मास्टर प्लान के अनुसार निर्माण और सड़क चौड़ीकरण के काम चल रहे हैं। उनके मुताबिक जिन मकानों या धार्मिक स्थलों का कुछ हिस्सा प्रस्तावित विकास कार्य में आ रहा है, कई जगह संबंधित लोग खुद उसे हटाकर प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।
कलेक्टर ने शाही मस्जिद के मामले में भी लोगों से अफवाहों से दूर रहने और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।
हाईकोर्ट में भी चल रहा है मामला
मस्जिद के हिस्से को हटाने की कार्रवाई के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया है। मस्जिद पक्ष का दावा है कि यह धार्मिक स्थल 100 साल से ज्यादा पुराना है और उसके पास इससे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हैं।
मस्जिद कमेटी की ओर से यह भी दावा किया गया है कि 1975 में यातायात व्यवस्था के लिए मस्जिद की ओर से जमीन दी गई थी और उसी जमीन पर सड़क बनी है। एकलपीठ से राहत नहीं मिलने के बाद मामला युगलपीठ के सामने रखा गया है।
मस्जिद पक्ष की याचिका पर सोमवार को इंदौर स्थित हाईकोर्ट की युगलपीठ में सुनवाई प्रस्तावित है। ऐसे में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ अदालत की कार्यवाही पर भी नजर बनी हुई है।
पहले से तैनात था पुलिस बल
संभावित विरोध को देखते हुए शनिवार रात से ही शाही मस्जिद के आसपास लोगों की मौजूदगी बढ़ गई थी। रविवार को भी विरोध और नारेबाजी की स्थिति रही। प्रशासन ने इलाके में बैरिकेडिंग के साथ पुलिस और RAF की तैनाती की थी।
सोमवार को कार्रवाई के दौरान भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। पथराव के बाद पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग किया और इलाके में स्थिति को नियंत्रित किया।
ओवैसी ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाए
AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए शाही मस्जिद से जुड़े घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वक्फ कानून में बदलाव का इस्तेमाल मस्जिदों, दरगाहों, खानकाहों और कब्रिस्तानों से जुड़े अधिकारों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
ओवैसी की यह प्रतिक्रिया उनके राजनीतिक बयान के रूप में सामने आई है। इस बीच उज्जैन में प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई मास्टर प्लान के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए की जा रही है।


