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Rafale vs J-16: मिस्र के आसमान में चीन की ‘हवाई क्लास’, पहली बार राफेल के साथ अभ्यास से क्या मिला?
चीन और मिस्र के संयुक्त सैन्य अभ्यास में J-16, Rafale और MiG-29 लड़ाकू विमानों की भागीदारी।लोकस्वामी ग्राफिक्स
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Rafale vs J-16: मिस्र के आसमान में चीन की ‘हवाई क्लास’, पहली बार राफेल के साथ अभ्यास से क्या मिला?

Reema Yadav4 min read25/08/26

चीन ने पहली बार अपने J-16 लड़ाकू विमानों को मिस्र में आयोजित संयुक्त सैन्य अभ्यास में उतारा है। अभ्यास के दौरान J-16 ने मिस्र के Rafale और MiG-29 लड़ाकू विमानों के साथ हवाई युद्ध की ट्रेनिंग की। चीन के लिए यह अभ्यास खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि उसे पहली बार मिस्र के राफेल के साथ प्रशिक्षण का मौका मिला है।

Lokswami AI

काहिरा। मिस्र के आसमान में इन दिनों ऐसा सैन्य अभ्यास चल रहा है, जिस पर भारत समेत दुनिया की नजर है। चीन ने पहली बार अपने J-16 फाइटर जेट को अफ्रीका में तैनात किया है और वह मिस्र के Rafale और MiG-29 लड़ाकू विमानों के साथ हवाई युद्ध की ट्रेनिंग कर रहा है।

यह असली जंग नहीं है, बल्कि चीन और मिस्र के बीच चल रहे ‘Eagles of Civilization 2026’ संयुक्त सैन्य अभ्यास का हिस्सा है। लेकिन इस अभ्यास की खासियत यह है कि पहली बार चीन के J-16 को मिस्र के Rafale के साथ प्रशिक्षण का मौका मिला है।

चीन के सरकारी मीडिया ने अभ्यास के शुरुआती दौर का फुटेज भी जारी किया है। इसमें चीनी J-16 और मिस्र के Rafale तथा MiG-29 आसमान में युद्ध जैसी परिस्थितियों में अभ्यास करते दिखाई दे रहे हैं।

मिस्र के आसमान में कैसी हुई ट्रेनिंग?

अभ्यास के पहले दिन फोकस सीधे हवाई मुकाबले की ट्रेनिंग पर रहा। दोनों देशों के लड़ाकू विमानों ने एक-दूसरे के खिलाफ अलग-अलग परिस्थितियों में अभ्यास किया।

ट्रेनिंग में ‘एक के मुकाबले एक’ और ‘दो के मुकाबले दो’ जैसे हवाई युद्ध परिदृश्यों का इस्तेमाल किया गया। इसका मकसद पायलटों को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में फैसला लेने और विमान को नियंत्रित करने की क्षमता को बेहतर बनाना था।

इसके साथ ही दोनों देशों की वायु सेनाओं ने उड़ान सुरक्षा, आपात स्थिति और संयुक्त ऑपरेशन से जुड़े तौर-तरीकों पर भी काम किया।

PLA एयर फोर्स यूनिट से जुड़े शेन हाओ के मुताबिक, चीन और मिस्र की ट्रेनिंग अब केवल बुनियादी डॉगफाइट तक सीमित नहीं है। दोनों सेनाएं व्यवस्थित संयुक्त अभियान की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

चीन के लिए Rafale को करीब से समझने का मौका

इस पूरे अभ्यास में चीन की सबसे ज्यादा दिलचस्पी मिस्र के Rafale विमानों को लेकर बताई जा रही है।

चीन के रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि संयुक्त अभ्यास में किसी दूसरे देश के आधुनिक फाइटर के साथ उड़ान भरना सिर्फ पायलटों की ट्रेनिंग नहीं होती। इससे उसकी उड़ान शैली, ऑपरेशनल तरीके और अलग-अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल की रणनीति को समझने का अवसर भी मिलता है।

बीजिंग स्थित एयरोस्पेस नॉलेज मैगजीन के एडिटर वांग यानान ने इसे चीन के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया है। उनके मुताबिक, मिस्र के पास मौजूद Rafale के साथ ट्रेनिंग से चीन को इस विमान को बेहतर तरीके से समझने का मौका मिल सकता है।

यही वजह है कि इस अभ्यास को भारत के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। भारत भी Rafale का इस्तेमाल करता है।

भारत की नजर क्यों?

भारत और चीन के बीच लंबे समय से सैन्य प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। ऐसे में चीन को Rafale जैसे विमान के साथ अभ्यास का मौका मिलना भारतीय रणनीतिक हलकों के लिए स्वाभाविक रूप से दिलचस्प है।

हालांकि, सिर्फ संयुक्त अभ्यास के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि चीन को Rafale की पूरी तकनीकी जानकारी मिल गई है। अलग-अलग देशों के विमान, हथियार, सॉफ्टवेयर और मिशन कॉन्फिगरेशन अलग हो सकते हैं।

फिर भी इस तरह की ट्रेनिंग से चीन को एक ऐसे पश्चिमी फाइटर की ऑपरेशनल क्षमताओं को समझने का अनुभव जरूर मिलता है, जिसका इस्तेमाल भारत भी करता है।

J-16 आखिर कितना खास है?

J-16 चीन का ट्विन-इंजन, दो सीटों वाला मल्टीरोल फाइटर है। इसे लंबी दूरी के मिशनों और अलग-अलग तरह के ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है।

इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़े सिस्टम लगाए गए हैं। चीन इसे अपनी वायुसेना के प्रमुख 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में गिनता है।

J-16 आकार और वजन के मामले में J-10 से बड़ा है और इसमें दो इंजन लगे हैं। दो सीटों वाला डिजाइन इसे अलग-अलग मिशनों में अतिरिक्त ऑपरेशनल लचीलापन देता है।

Rafale की ताकत क्या है?

Rafale फ्रांस की Dassault Aviation द्वारा बनाया गया 4.5 पीढ़ी का ट्विन-इंजन मल्टीरोल फाइटर है। इसकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक यह है कि इसे अलग-अलग तरह के मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह हवा से हवा में लड़ाई के साथ-साथ जमीन और समुद्र से जुड़े मिशनों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी अधिकतम गति करीब Mach 1.8 बताई जाती है।

Rafale की ताकत केवल उसकी स्पीड में नहीं है। इसके सेंसर, एवियोनिक्स, हथियारों को एक साथ इस्तेमाल करने की क्षमता और अलग-अलग मिशनों में तेजी से भूमिका बदलने की क्षमता इसे आधुनिक मल्टीरोल फाइटर बनाती है।

चीन पहले भी मिस्र में भेज चुका है J-10

यह पहली बार नहीं है जब चीन और मिस्र ने संयुक्त हवाई अभ्यास किया हो। इससे पहले 2025 में चीन ने ‘Eagles of Civilization’ अभ्यास के लिए J-10 फाइटर जेट भेजे थे।

लेकिन 2026 के अभ्यास में J-16 को उतारना एक नया बदलाव है। इस बार अभ्यास में चीनी J-16 के साथ मिस्र के Rafale और MiG-29 भी शामिल हैं।

यानी इस बार चीन को एक ही अभ्यास में अलग-अलग डिजाइन और तकनीक वाले लड़ाकू विमानों के साथ प्रशिक्षण का मौका मिला है।

क्या यह सिर्फ अभ्यास है या बड़ा रणनीतिक संकेत?

सैन्य अभ्यासों का मकसद केवल पायलटों की ट्रेनिंग नहीं होता। इनके जरिए देश एक-दूसरे के साथ ऑपरेशनल तालमेल, संचार व्यवस्था और युद्ध की परिस्थितियों में प्रतिक्रिया की क्षमता भी परखते हैं।

चीन और मिस्र के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग इसी व्यापक रिश्ते का हिस्सा माना जा रहा है। अफ्रीका में J-16 की तैनाती से चीन अपनी वायुसेना की लंबी दूरी की ऑपरेशनल क्षमता भी प्रदर्शित कर रहा है।

फिलहाल यह अभ्यास किसी वास्तविक संघर्ष का संकेत नहीं है। लेकिन Rafale, MiG-29 और J-16 का एक ही आसमान में युद्धाभ्यास आधुनिक हवाई युद्ध की रणनीति को समझने के लिहाज से जरूर महत्वपूर्ण है।

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