RSS के ‘प्रचारक’ के सामने कांग्रेस सेवादल के ‘विचारक’, MP में वैचारिक मुकाबले की तैयारी; गांव-गांव पहुंचाने की रणनीति
मध्यप्रदेश में कांग्रेस सेवादल ने संगठन को मजबूत करने के साथ वैचारिक स्तर पर भाजपा और RSS का मुकाबला करने की रणनीति बनाई है। प्रदेशभर में ‘विचारक टीम’ तैयार करने की योजना है। इसके लिए भोपाल में पदाधिकारियों की बैठक और ब्लॉक से बूथ स्तर तक प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे।

Audio tools for this article
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में मुकाबला अब सिर्फ चुनावी मैदान तक सीमित रखने की तैयारी नहीं है। कांग्रेस सेवादल ने संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने के साथ वैचारिक मोर्चे पर भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने का फैसला किया है। इसके तहत प्रदेशभर में ऐसे कार्यकर्ताओं की टीम तैयार की जाएगी, जो लोगों के बीच जाकर कांग्रेस की विचारधारा, सामाजिक मुद्दों और आम नागरिकों से जुड़े सवालों पर संवाद कर सके।
सेवादल ने इस अभियान को ‘विचारक टीम’ का नाम दिया है। संगठन का कहना है कि इन कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देकर गांव, ब्लॉक और बूथ स्तर तक भेजा जाएगा। इसके जरिए पार्टी की बात सीधे लोगों तक पहुंचाने और जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की कोशिश होगी।
भोपाल की बैठक में तय होगी आगे की रणनीति
कांग्रेस सेवादल की इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए भोपाल में प्रदेशभर के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। इसमें जिलाध्यक्षों के साथ वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक में संगठन की मौजूदा स्थिति, आने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर चर्चा होगी।
सेवादल की योजना केवल प्रदेश या जिला मुख्यालय तक संगठन को सीमित रखने की नहीं है। इसके लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाएगा और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग मुद्दों पर जनता के बीच संवाद करने के लिए तैयार किया जाएगा।
RSS के ‘प्रचारक’ के जवाब में कांग्रेस का ‘विचारक’ मॉडल
सेवादल प्रदेश अध्यक्ष अवनीश भार्गव ने इस अभियान को सीधे RSS की कार्यशैली से जोड़ते हुए अपनी रणनीति बताई है। उनका कहना है कि RSS लंबे समय से अपने प्रचारकों के जरिए संगठन और विचारधारा को समाज के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाता रहा है।
कांग्रेस सेवादल अब इसी तरह प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की अपनी टीम तैयार करना चाहता है। हालांकि संगठन इसे केवल राजनीतिक प्रचार तक सीमित नहीं रखना चाहता। सेवादल के मुताबिक, उसके ‘विचारक’ लोगों के बीच जाकर सामाजिक सद्भाव, संविधान, नागरिक अधिकार और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करेंगे।
नफरत और हिंसा के मुद्दे पर BJP-RSS को घेरने की तैयारी
सेवादल प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा और RSS पर राष्ट्रवाद के नाम पर नफरत की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कांग्रेस सेवादल इसके खिलाफ अपनी वैचारिक बात जनता के सामने रखेगा।
संगठन का फोकस ऐसे मुद्दों पर रहेगा, जिनका सीधा संबंध आम लोगों से है। इनमें सामाजिक सद्भाव, नागरिक अधिकार, संविधान और समाज में बढ़ती कथित नफरत जैसे विषय शामिल किए जाने की तैयारी है।
यानी कांग्रेस सेवादल अब सिर्फ कार्यक्रम आयोजित करने वाले संगठन की भूमिका में नहीं रहना चाहता। उसकी कोशिश अपने कार्यकर्ताओं को बोलने, समझाने और स्थानीय मुद्दों पर लोगों के बीच लगातार मौजूद रहने वाले चेहरे के रूप में तैयार करने की है।
ब्लॉक से बूथ तक पहुंचेगी टीम
इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका जमीनी ढांचा है। सेवादल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेगा। यहां कार्यकर्ताओं को संगठन की विचारधारा और जनता के बीच संवाद के तरीके से परिचित कराया जाएगा।
इसके बाद इन्हें ब्लॉक, बूथ और गांव स्तर पर सक्रिय करने की योजना है। पार्टी की रणनीति साफ है—अगर भाजपा और RSS का प्रभाव जमीनी स्तर पर मजबूत है, तो कांग्रेस को भी अपने कार्यकर्ताओं की मौजूदगी उसी स्तर तक बढ़ानी होगी।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम है यह प्रयोग?
मध्यप्रदेश में कांग्रेस लंबे समय से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की चुनौती का सामना कर रही है। ऐसे में सेवादल का यह प्रयोग केवल वैचारिक अभियान नहीं, बल्कि संगठन को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
‘विचारक टीम’ के जरिए कांग्रेस ऐसे कार्यकर्ताओं को सामने लाना चाहती है, जो स्थानीय स्तर पर लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहें। इससे पार्टी को चुनाव के समय अचानक सक्रिय होने के बजाय पूरे साल जमीनी नेटवर्क तैयार रखने में मदद मिल सकती है।
अब जवाबी वैचारिक राजनीति का दौर?
कांग्रेस सेवादल की इस पहल के बाद मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक बहस का एक नया मोर्चा खुल सकता है। RSS के लंबे समय से चले आ रहे संगठनात्मक मॉडल के मुकाबले कांग्रेस अब अपने कार्यकर्ताओं को वैचारिक प्रशिक्षण देकर मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।
हालांकि इस रणनीति का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब प्रशिक्षण शिविरों के बाद तैयार की जाने वाली टीमें नियमित रूप से गांव और बूथ स्तर पर सक्रिय होंगी। फिलहाल सेवादल ने संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में मध्यप्रदेश की राजनीति में चुनावी नारों के साथ विचार और विचारधारा की लड़ाई भी तेज करने की तैयारी है।
