
‘देश का खाते हैं, पड़ोसी का गुणगान करते हैं’… कंगना ने नसीरुद्दीन शाह को कहा ‘लोमड़ी’, पीयूष मिश्रा के सवाल से भड़की नई बहस
छात्र आंदोलनों पर बॉलीवुड की चुप्पी को लेकर शुरू हुई बहस अब कंगना रनौत और नसीरुद्दीन शाह तक पहुंच गई है। पीयूष मिश्रा के सवाल का समर्थन करते हुए कंगना ने नसीरुद्दीन पर तीखा हमला किया और उन्हें ‘लोमड़ी’ कहा।

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नई दिल्ली। एक बयान नसीरुद्दीन शाह ने दिया, सवाल पीयूष मिश्रा ने उठाया और जवाब देने मैदान में कंगना रनौत उतर आईं। छात्र आंदोलनों पर फिल्मी सितारों की चुप्पी को लेकर शुरू हुई बहस अब बॉलीवुड के तीन बड़े नामों की जुबानी जंग बन गई है। बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह पर बेहद तीखा हमला करते हुए उन्हें ‘लोमड़ी’ तक कह दिया और आरोप लगाया कि वे भारत में रहते हुए पड़ोसी देश के पक्ष में खड़े दिखाई देते हैं।
कहानी शुरू हुई थी ‘मुंह में हड्डी’ वाले बयान से
कुछ सप्ताह पहले नसीरुद्दीन शाह ने दिल्ली में हुए CJP से जुड़े छात्र प्रदर्शनों पर फिल्म इंडस्ट्री की चुप्पी को लेकर सवाल उठाया था। उन्होंने एक कहावत का सहारा लेते हुए कहा था कि जिस कुत्ते के मुंह में हड्डी हो, वह भौंक नहीं सकता; हड्डी गिरने या दांत टूटने के बाद ही आवाज निकलती है। उनका निशाना उन बड़े कलाकारों पर था जो आंदोलन के दौरान सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोल रहे थे।
फिर रांची पहुंचे पीयूष मिश्रा और सवाल पलट दिया
विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब अभिनेता, लेखक और गायक पीयूष मिश्रा झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन के बीच पहुंचे। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शनकारियों के बीच खड़े होकर उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान को ही उनके सामने सवाल बना दिया। पीयूष का आशय था कि अगर दूसरे आंदोलनों पर कलाकारों की चुप्पी गलत थी, तो अब झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर बोलने वाले चेहरे कहां हैं।
पीयूष के सवाल पर कंगना की एंट्री
कंगना रनौत ने पीयूष मिश्रा के बयान से जुड़ी एक रिपोर्ट अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा की और वहीं से विवाद की भाषा और तीखी हो गई। कंगना ने लिखा कि हर व्यक्ति किसी न किसी अर्थ में किसी का ‘कुत्ता’ हो सकता है, लेकिन उन्हें गर्व है कि वे जिस देश की रोटी खाती हैं, उसकी रक्षा और उसके लिए लड़ने की बात करती हैं। इसी पोस्ट में उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ कहा और खुद को वफादारी से जोड़ते हुए ‘कुत्ता’ कहलाना बेहतर बताया।
‘इस देश का खाते हैं…’ वाला वार सबसे ज्यादा चर्चा में
कंगना की टिप्पणी का सबसे तीखा हिस्सा नसीरुद्दीन शाह के राजनीतिक विचारों को लेकर था। उन्होंने दावा किया कि नसीरुद्दीन भारत से जुड़े हैं लेकिन उनका रुख पड़ोसी देश के पक्ष में दिखाई देता है। यह कंगना का राजनीतिक आरोप है, कोई स्थापित तथ्य नहीं। सोशल मीडिया पर इसी हिस्से ने बहस को छात्र आंदोलन से हटाकर राष्ट्रवाद और कलाकारों की राजनीतिक विचारधारा तक पहुंचा दिया।
‘लोमड़ी’ क्यों कहा? कंगना ने वफादारी का दिया तर्क
कंगना ने अपनी प्रतिक्रिया में कुत्ते को अपमान नहीं बल्कि वफादारी के प्रतीक के रूप में पेश किया। उनका कहना था कि आज के दौर में वफादारी दुर्लभ है, इसलिए उन्हें ‘लोमड़ी’ जैसा होना पसंद नहीं होगा। इस तुलना के जरिए उन्होंने सीधे नसीरुद्दीन के उसी रूपक को पलट दिया, जिससे मूल विवाद शुरू हुआ था।
एक आंदोलन से शुरू बहस अब ‘कौन कब बोलता है’ पर अटकी
यह विवाद केवल तीन कलाकारों के निजी मतभेद की कहानी नहीं रह गया है। असली सवाल अब यह है कि सार्वजनिक मुद्दों पर फिल्मी हस्तियों से हर बार एक जैसी प्रतिक्रिया की अपेक्षा की जा सकती है या नहीं। नसीरुद्दीन ने पहले चुप रहने वाले कलाकारों पर सवाल उठाया, पीयूष ने उसी कसौटी पर नसीरुद्दीन को घेरा और कंगना ने इसे राष्ट्रवाद की बहस में बदल दिया।
तीनों की भाषा अलग है, लेकिन केंद्र में एक ही सवाल बचता है—क्या कलाकारों की चुप्पी भी उतनी ही राजनीतिक मानी जाए जितना उनका बोलना?




