गोवा नाइटक्लब अग्निकांड में लूथरा ब्रदर्स को SC से झटका, जमानत रद्द; 25 मौतों के मामले में 2 हफ्ते में सरेंडर
गोवा के नाइटक्लब अग्निकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लूथरा ब्रदर्स समेत तीन आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के जमानत रद्द करने के आदेश को बरकरार रखते हुए तीनों को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया। अग्निकांड में 25 लोगों की मौत हुई थी।

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गोवा के उस नाइटक्लब अग्निकांड मामले में लूथरा ब्रदर्स को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली, जिसने 25 लोगों की जान ले ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें मामले के तीन आरोपियों की जमानत रद्द कर दी गई थी।
अदालत ने तीनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। साथ ही निचली अदालत को मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया में तेजी लाने और ट्रायल को जल्द आगे बढ़ाने को कहा है।
SC में लूथरा ब्रदर्स ने क्या दलील दी?
लूथरा ब्रदर्स की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और सिद्धार्थ दवे ने सुप्रीम कोर्ट में दलील रखी। बचाव पक्ष ने कहा कि घटना जानबूझकर किया गया अपराध नहीं थी, बल्कि अधिकतम लापरवाही का मामला माना जा सकता है।
सिद्धार्थ दवे ने तर्क दिया कि आरोपियों की ओर से ऐसा कोई प्रत्यक्ष कृत्य नहीं किया गया, जिससे मौतें हुई हों। उन्होंने कहा कि मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 304 पार्ट II लागू नहीं होती और यदि अभियोजन पक्ष की दलील स्वीकार भी की जाए तो मामला धारा 304A के तहत लापरवाही से मौत का बन सकता है।
25 लोगों की मौत पर कोर्ट ने पूछे सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने बचाव पक्ष से रेस्टोरेंट में हुई मौतों की संख्या को लेकर सवाल किया। सिंघवी ने बताया कि अग्निकांड में 25 लोगों की मौत हुई थी।
बचाव पक्ष ने हाई कोर्ट के फैसले में कथित कानूनी खामियों का भी मुद्दा उठाया। यह दलील भी दी गई कि मामले में कुछ अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
एक अन्य आरोपी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल की कारोबार में हिस्सेदारी केवल 10 प्रतिशत है और उनका इस घटना से सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं है।
सरकार ने जमानत का किया विरोध
गोवा सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और स्टैंडिंग काउंसिल सुरजेंदु शंकर दास ने आरोपियों की याचिकाओं का विरोध किया।
सरकार की ओर से हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि आरोपियों को पहले ही दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने आरोपियों को आज से दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का समय दिया है।
हाई कोर्ट ने क्यों रद्द की थी जमानत?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 18 अगस्त को तीनों आरोपियों की जमानत रद्द कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने जांच के दौरान सामने आए सबूतों पर उचित तरीके से विचार नहीं किया।
हाई कोर्ट के मुताबिक, ट्रायल कोर्ट ने अपराध की गंभीरता का आकलन करते समय यह मान लिया था कि मामला हत्या या डकैती जैसे गंभीर अपराध की श्रेणी में नहीं आता। हाई कोर्ट ने इस दृष्टिकोण पर आपत्ति जताई थी।
कोर्ट ने नाइटक्लब की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण को लेकर भी गंभीर टिप्पणियां की थीं।
बिना लाइसेंस चल रहा था रेस्टोरेंट?
हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, रिकॉर्ड में ऐसी सामग्री मौजूद थी जिससे संकेत मिलता था कि रेस्टोरेंट जरूरी लाइसेंस के बिना संचालित किया जा रहा था। इसके भवन और ढांचे को लेकर भी नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई थी।
अदालत ने यह भी कहा था कि आरोपी और उनके साझेदार कथित तौर पर इस बात से परिचित थे कि बिना जरूरी सुरक्षा इंतजामों के परिसर में आतिशबाजी करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
यही परिस्थितियां जमानत रद्द किए जाने के फैसले में अहम मानी गईं।
घटना के बाद विदेश भागने का भी आरोप
अग्निकांड के बाद लूथरा परिवार के फुकेत, थाईलैंड जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल का ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया।
भारतीय मिशन के हस्तक्षेप के बाद थाई अधिकारियों ने 11 दिसंबर को फुकेत में दोनों को हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें भारत लाया गया।
16 दिसंबर 2025 को दिल्ली की एक अदालत ने गोवा पुलिस को आरोपियों की दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी थी।
अब ट्रायल पर रहेगी नजर
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद तीनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा। इसके साथ ही निचली अदालत में मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
अब अदालत में आरोप तय होने और उसके बाद शुरू होने वाले ट्रायल से यह तय होगा कि अग्निकांड के लिए किसकी क्या भूमिका थी और किन आरोपों को अदालत में साबित किया जा सकता है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने जमानत से जुड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है, जबकि मामले में आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम फैसला ट्रायल के बाद ही होगा।


