अलर्ट: वायरल '80s AI फोटो ट्रेंड बन रहा है फोन हैक करने का जरिया, अमरोहा में तीन लोग निशाने पर
अमरोहा में साइबर ठगों ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे '80s नॉस्टैल्जिया' AI फोटो ट्रेंड का इस्तेमाल जाल बिछाने के लिए किया। अनजान नंबरों से भेजे गए लिंक पर क्लिक करने के बाद तीन लोग ठगी का शिकार हुए, जिनमें से एक के बैंक खाते से ₹16,000 निकाल लिए गए।

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यह ट्रेंड AI की मदद से आम फोटो और वीडियो को पुराने 1980 के दशक के अंदाज़ में बदल देता है, और पिछले कुछ हफ्तों में सोशल मीडिया पर तेजी से फैला है। ठगों ने इसी लोकप्रियता का फायदा उठाते हुए व्हाट्सऐप पर अनजान नंबरों से ऐसे लिंक भेजने शुरू कर दिए, जिनमें दावा किया गया कि क्लिक करते ही यूजर भी वैसी ही फोटो और वीडियो बना सकेगा। लिंक खोलते ही फोन पर कंट्रोल जाने का खतरा पैदा हो गया, और एक मामले में बैंक खाता भी खाली हो गया।
क्या हुआ था?
अमरोहा के कुरैशी मोहल्ले के रहने वाले मोहम्मद दानिश को व्हाट्सऐप पर एक अनजान नंबर से मैसेज मिला। दावा किया गया था कि लिंक पर क्लिक करते ही वे भी सोशल मीडिया पर छाए '80s स्टाइल' की फोटो और वीडियो बना सकेंगे।
दानिश ने लिंक खोल दिया। इसके तुरंत बाद उनके फोन का कंट्रोल कथित तौर पर ठगों के हाथ में चला गया। फोन से लिंक बैंक खाते से ₹16,000 निकाल लिए गए। नुकसान का एहसास होते ही दानिश ने अपना फोन इंटरनेट से डिस्कनेक्ट किया।
इसी तरह के लिंक जयोम नगर मोहल्ले के मनोज कुमार और दानिशमंदान के अरशद को भी मिले। दोनों को भी इसी तरीके से निशाना बनाया गया, लेकिन उनके बैंक खाते फोन से लिंक नहीं थे, इसलिए उनका पैसा सुरक्षित रहा।
तीनों पीड़ितों ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई है।
यह ठगी कैसे काम करती है?
कोई ट्रेंड जब वायरल हो चुका होता है, तो लोगों की सतर्कता अपने आप कम हो जाती है। जब कोई मैसेज ऐसी चीज़ का वादा करता है जो पहले से ही यूजर की टाइमलाइन पर छाई हुई है, तो वह संदिग्ध नहीं बल्कि प्रासंगिक लगने लगता है। ठगी का पूरा खेल इसी भरोसे पर टिका है।
पुलिस और साइबर सेल अधिकारियों के मुताबिक, ठग गिरोह अब आम फिशिंग मैसेज की जगह जो भी उस वक्त वायरल हो, चाहे वह कोई AI फिल्टर हो, त्योहारी ऑफर हो या कोई चैलेंज, उसी को हथियार बना रहे हैं। विषय बदलता रहता है, तरीका नहीं: भेष बदलकर आया एक खतरनाक लिंक, जो यूजर को वही चीज़ देने का वादा करता है जो वह पहले से चाहता है।
निचोड़
किसी ट्रेंड का वायरल होना इस बात की गारंटी नहीं है कि उससे जुड़ा लिंक सुरक्षित है। अमरोहा के मामले दिखाते हैं कि ठग असल में यह देख रहे हैं कि इंटरनेट पर इस वक्त क्या चल रहा है, और उसी के आधार पर तुरंत जाल बुन रहे हैं।
अगर कोई वायरल AI ट्रेंड आज़माना है, तो सिर्फ उसकी आधिकारिक ऐप या वेबसाइट का इस्तेमाल करें। किसी अनजान नंबर से आया लिंक चाहे कितना भी प्रासंगिक क्यों न लगे, उसे कभी न खोलें।
अगर गलती से किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक हो चुका है: तुरंत फोन को इंटरनेट से डिस्कनेक्ट करें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।

