36 हजार फीट पर अचानक बदली फ्लाइट की ऊंचाई, तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में प्रेशर लॉस; AI-2379 की जांच में पायलट टेस्ट भी सवालों में
एयर इंडिया की AI-2379 फ्लाइट में 36 हजार फीट पर तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में प्रेशर लॉस हुआ। ऑटोपायलट डिसएंगेज और स्टॉल वॉर्निंग के बाद सिस्टम सामान्य हो गए। जांच में पायलट का साइको-एक्टिव सब्सटेंस टेस्ट नॉन-नेगेटिव मिला।

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आसमान में करीब 36 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा एयर इंडिया का विमान अचानक सामान्य क्रूज से बाहर चला गया। कुछ ही सेकेंड में विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में प्रेशर लॉस दर्ज हुआ और कॉकपिट में ऑटोपायलट भी डिसएंगेज हो गया। कुछ समय के लिए स्टॉल वॉर्निंग ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
यह घटना एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट AI-2379 से जुड़ी है। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक विमान बाद में सुरक्षित दिल्ली पहुंच गया, लेकिन घटना के बाद तकनीकी सिस्टम के साथ-साथ फ्लाइट क्रू से जुड़ा एक अलग पहलू भी जांच के दायरे में आ गया है।
क्रूज के दौरान कुछ सेकेंड में बदल गया पूरा घटनाक्रम
4 अगस्त 2026 को फुकेट से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली AI-2379 में कुल 145 लोग सवार थे। इनमें 137 यात्री, छह केबिन क्रू और दो पायलट शामिल थे।
विमान एफएल360 यानी करीब 36 हजार फीट पर क्रूज कर रहा था। इसी दौरान हाइड्रोलिक सिस्टम में असामान्य स्थिति सामने आई। सबसे पहले ग्रीन सिस्टम में प्रेशर लॉस दर्ज हुआ। इसके बाद ब्लू और येलो सिस्टम में भी दबाव कम होने की जानकारी मिली।
स्थिति के दौरान विमान की ऊंचाई में भी अचानक उतार-चढ़ाव हुआ। रिपोर्ट में विमान के करीब 372 फीट ऊपर जाने और फिर लगभग 292 फीट नीचे आने का उल्लेख है।
ऑटोपायलट ने साथ छोड़ा, स्टॉल वॉर्निंग भी आई
तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में गड़बड़ी के बीच विमान का ऑटोपायलट डिसएंगेज हो गया। इसके अलावा कुछ सेकेंड के लिए स्टॉल वॉर्निंग भी सामने आई।
हाइड्रोलिक सिस्टम विमान के फ्लाइट कंट्रोल्स के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में एक ही घटना के दौरान तीनों सिस्टम में प्रेशर लॉस दर्ज होना जांच का अहम हिस्सा बन गया है।
हालांकि राहत की बात यह रही कि सिस्टम कुछ ही सेकेंड में रिकवर हो गए। फ्लाइट कंट्रोल्स सामान्य होने के बाद चालक दल ने विमान को दिल्ली तक ले जाने का फैसला किया।
दिल्ली पहुंचने के बाद 24 लोगों को मेडिकल मदद
घटना के दौरान सीट बेल्ट साइन बंद होने की जानकारी भी रिपोर्ट में सामने आई है। विमान की अचानक हुई हलचल के कारण कुछ यात्रियों और केबिन क्रू को चोटें आईं।
दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद कुल 24 लोगों को मेडिकल सहायता दी गई। इनमें 20 यात्री और चार केबिन क्रू सदस्य शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोगों को मामूली चोटों के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि चार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
विमान के भीतर ओवरहेड बिन, सीलिंग पैनल, हैंडरेल और इमरजेंसी एग्जिट हैंडल समेत कुछ हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा।
जांच में पायलट का टेस्ट भी बना अहम बिंदु
तकनीकी गड़बड़ी की जांच के बीच फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड का साइको-एक्टिव सब्सटेंस टेस्ट भी किया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक इसका कन्फर्मेटरी टेस्ट नॉन-नेगेटिव आया।
AAIB ने इस परिणाम को गंभीर चिंता का विषय माना है और DGCA से साइको-एक्टिव सब्सटेंस के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित कार्रवाई की अंतरिम सिफारिश की है।
हालांकि यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि नॉन-नेगेटिव टेस्ट का मतलब सीधे तौर पर यह साबित होना नहीं है कि पायलट उड़ान के समय नशे में था। इस टेस्ट के परिणाम और उनका विमान संचालन से संबंध जांच का विषय हैं। अभी इसे हादसे की वजह भी नहीं माना गया है।
तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में एक साथ समस्या क्यों आई?
जांच एजेंसी अब उस तकनीकी कड़ी को समझने में जुटी है जिसके कारण ग्रीन, ब्लू और येलो सिस्टम में क्रमशः प्रेशर लॉस हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार विमान उड़ान से पहले MEL के तहत PTU से जुड़े एक आइटम के साथ ऑपरेट कर रहा था। उड़ान के दौरान हाइड्रोलिक सिस्टम में आई समस्या और इस स्थिति के बीच कोई संबंध है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
अभी तक जांच एजेंसी ने तीनों सिस्टम में एक साथ आई गड़बड़ी की अंतिम वजह निर्धारित नहीं की है।
मौसम को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट कनेक्शन नहीं
घटना के समय खराब मौसम से जुड़ा कोई स्पष्ट संकेत जांच में सामने नहीं आया है। पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच भी प्रतिकूल मौसम को लेकर किसी विशेष सूचना की बात रिपोर्ट में नहीं बताई गई है।
इसलिए फिलहाल मौसम को घटना का कारण मानने का आधार नहीं है। जांच का फोकस तकनीकी सिस्टम, संचालन और अन्य संभावित कारणों पर बना हुआ है।
अब फ्लाइट रिकॉर्डर बताएगा असल कहानी
घटना की कड़ी को समझने के लिए AAIB ने विमान के फ्लाइट रिकॉर्डर्स से डेटा हासिल किया है। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है।
इसके अलावा एयरबस के तकनीकी विशेषज्ञों ने भी विमान का निरीक्षण किया है। हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़े कंपोनेंट्स और फ्लूड सैंपल्स को आगे की जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी है।
इन जांचों से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सिस्टम में प्रेशर लॉस किस वजह से हुआ और कुछ ही सेकेंड बाद वे दोबारा सामान्य कैसे हो गए।
प्रीलिमिनरी रिपोर्ट के बाद अभी कई सवाल बाकी
AI-2379 की प्रारंभिक जांच ने घटना के तकनीकी और ऑपरेशनल दोनों पहलुओं को सामने ला दिया है, लेकिन इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
36 हजार फीट पर तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में क्रमिक प्रेशर लॉस क्यों हुआ, विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव किस वजह से आया और पायलट के नॉन-नेगेटिव साइको-एक्टिव सब्सटेंस टेस्ट का इस घटना से कोई संबंध था या नहीं—इन सवालों के जवाब विस्तृत जांच से ही मिलेंगे।
फिलहाल विमान सुरक्षित दिल्ली पहुंच गया था और तकनीकी सिस्टम भी दोबारा सामान्य हो गए थे। अब नजर AAIB की आगे की जांच और अंतिम निष्कर्ष पर है।

